जितने दिन जीना है उतने दिन सीखना है

मनुष्य जीवन पर्यन्त सीखने वाला सामाजिक प्राणी है । स्वामी जी भी यही कहते हैं जितने दिन जीना है उतने दिन  सीखना हैं पर यहाँ एक आवश्यक बात ध्यान में रखने योग्य हे कि जो कुछ सीखना हैं उसे अपनौसाँचे में ढ़ाल लेना है। अपन असल तत्व को बचाकर बाकी चीजें सीखनी हैं।
सार शिक्षा का ध्येय यही है कि मनुष्य का सर्वांगीण विकास । जो शिक्षा मनुष्य को उसके जीवन को समर्थ  बना सकती , जो मनुष्य में चरित्र-बल ,पर-हित भावना तथा सिंह के समान साहस नहीं ला शक्ति , वह कोई शिक्षा हो ही नहीं सकती।  शिक्षा का अर्थ पठन मात्र है क्या ? नहीं ! शिक्षा का अर्थ विभिन्न प्रकार के ज्ञानार्जन भी नहीं है।  वास्तव में शिक्षा तो वह है  जिससे हम अपने जीवन का निर्माण कर सकें , मनुष्य बन सकें , चरित्र का गठन कर सकें और विचारों आ सामंजस्य कर सकें वही वास्तव में शिक्षा है।

Popular posts from this blog

उत्तर प्रदेश की प्रमुख फसलें कौन-कोन सी हैं

जेट-प्रवाह ( Jet Streams ) क्या है

विभिन्न देशों के राष्ट्रीय पशु