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जानिऐ संविधान में संशोधन की प्रक्रिया क्या है

नमस्कार दोस्तों !

      भारतीय संविधान को 26 नवम्बर 1949 को अपनाया गया जबकि  26 जनवरी 1950 को इसे पूर्ण रूप से लागू कर  दिया गया।  समय और स्थिति की मांग के अनुसार इसमें संशोधन समय-समय पर होता रहता है।

•      पहला संविधान संशोधन सन 1951 ई•  को किया  गया  जिसके द्वारा संविधान में नौंवी अनुसूची को जोड़ा गया।

•      संविधान में संशोधन की प्रक्रिया के विषय में संविधान के अनुच्छेद 368 में उल्लेख किया गया है। इसमें संशोधन की तीन विधियों को अपनाया गया है --

1)  साधारण विधि द्वारा संशोधन : 

         जो भी विधेयक संसद की साधारण बहुमत द्वारा पारित किया गया होता है वह राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलन के पश्चात कानून बन जाता है।

इसके द्वारा राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति मिलने पर  निम्न संशोधन किये जा सकते हैं ----
नये राज्यों के निर्माण  संबंधी  , 
राज्य के क्षेत्र ,  सीमा , नाम में परिवर्तन संबंधी ,
केन्द्र द्वारा शासित प्रदेशों में प्रशासन संबंधी संशोधन किये जाते हैं।

2) विशेष बहुमत द्वारा संशोधन : 

   
              यदि संसद के प्रत्येक सदन द्वारा कूल सदस्यों का बहुमत व मतदान में भाग लेने वाले सदस्यों के 2/3 मतों से विधियक पारित हो जाए  तो  राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलते ही वह संशोधन , संविधान का विशेष अंग बन जाता हैं।
न्यायपालिका तथा राज्यों के अधिकार व शक्तियों को छोड़कर अन्य सभी व्यवस्थाओं में इसके द्वारा संशोधन किया जाता है।

3) संसद के विशेष बहुमत और राज्य विधानमण्डलों की स्वीकृति द्वारा :    


          संविधान के कुछ अनुच्छेदों में संशोधन के लिए विधेयक को संसद की दोनों सदनों क विशेष बहुमत द्वारा तथा राज्यों के कुल विधानमण्डलों में से आधे द्वारा स्वीकृति जरूरी है। इसके द्वारा निम्न संशोधन किये जा सकते हैं ---
राष्ट्रपति का निर्वाचन तथा निर्वाचन कि कार्य-पद्धति ,
संघ  तथा राज्यों की कार्यपालिका संबंधी शक्ति का विस्तार ,
संघीय , केन्द्रशासित तथा राज्यों के न्यायपालिका संबंधी ,
सातवीं अनुसूची का कोई विषय ,
संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व संबंधी ,
संविधान संशोधन की प्रक्रिया से संबंधित संशोधन किया जाता है।