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क्या "अच्छे दिन" समस्या का पर्याय है ?

कितने आराम से जी रहे थे न ! ये मोदी जी आये और सबको परेशानी में डाल दिये हैं। इनको हम वोट इसलिए दिये थे क्योंकि ये कह रहे थे अच्छे दिन हम लाऐंगे। वो दिन लाऐ मगर अच्छे दिन नहीं बुरे दिन । अच्छे दिन का मतलब तो हम समझ रहे थे जीवन सुगम होगा, महंगायी कम होगी, रोजगार के नये रास्ते खुलेंगे, न्यायिक ब्यवस्था व प्रशासनिक ब्यवस्था सुधरेगी , भ्रष्टाचार का कीडा कम होगा , कुल मिलाकर भारतवासियों का जीवन सुखमय बीतेगा ।  लेकिन दुख इस बात का है इन किसी भी ब्यवस्था में सुधार नहीं हुआ हैं बल्कि दैनिक जीवन में तो और समस्यायें बढ गयी हैं।
एक तानासाही निर्णय लिया इन्होने नोटबंदी का , भला किसी भी लोकतांत्रिक देश में ऐसे निर्णय लिया जाता है क्या ?
एक विचारधारा को जबरन पूरे देश पर थोपा जा रहा । क्या ऐसा किसी लोकतंत्र में होता हे क्या ?
शायद होता होगा किसी कमजोर लोकतंत्र में !
ऐसा लग रहा है वो अच्छे दिन का मतलब कुछ और कह रहे थे और हम कुछ और ही समझ बैठे।