स्वामी विवेकानन्द के ये शब्द बहुत प्रेरणा देने वाले हैं


उठो, साहसी बनो, वीर्यवान बनो।
सब उत्तरादायित्व अपने कन्धे पर लो।
याद रखो कि तुम स्वयं अपने भाग्य क निर्माता हो। तुम जो कुछ बल या सहायता चाहो, वह सब तुम्हारे भीतर ही विद्यमान है ।
अत: इस ज्ञानरूप शक्ति के सहारे तुम बल प्राप्त करो और अपने हांथों अपना भविष्य गढ़ डालो।

Popular posts from this blog

उत्तर प्रदेश की प्रमुख फसलें कौन-कोन सी हैं

जेट-प्रवाह ( Jet Streams ) क्या है

विभिन्न देशों के राष्ट्रीय पशु