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गरीबों का दोहन हो रहा है और आप ये कह रहे हैं

छात्र और गरीब महंगायी से परेशान हैं । और इस समय तो आपके राष्ट्रीयकृत बैंकं एसबीआई ने इनके शोषण पर उतारु हो गया हैं। अब आप ही बताऐ जो छात्र घर से दूर किसी शहर में किराये पर कमरे लेकर पढ़ाई करता हैं उसको उसके घर से बहुत ही कम  पैसे मिलते हैं तो इनके इस मिनिमम बैलेंस वाले  रूल को वह कैसे फालो कर पायेगा। यही स्थिति गरीब की भी हैं। जिसका जन-धन द्वारा खाता खुला उनको ही ले लिजिऐ । वो कैसे इस मिनिम्म बैलेंस रख पाऐगा वह तो अपना पूरा एकाउन्टवे खाली कर देगा कि भाण्ड में जाऐ यह बैंक ।

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