कार्बनिक रसायन का परिचय | अध्याय 12 | L 01 |

✓ 17 वीं शताब्दी में (1675) “ लीमरी ” ने पदार्थ को उनके प्राकृतिक स्रोत के आधार पर तीन वर्गों में विभाजित किया ..

१. खनिज पदार्थ 
२. वनस्पति पदार्थ 
३. जन्तु पदार्थ

✓ 18 वीं शताब्दी में (1784) , “लैवोसियर” ने प्रयोगों द्वारा यह बताया कि जंतु एवं वनस्पति स्रोतों से प्राप्त सभी पदार्थों में कार्बन और हाइड्रोजन तत्व मुख्य रूप से पाए जाते हैं।

✓  19वीं शताब्दी के प्रारंभ में पदार्थ को उनके प्राकृतिक स्रोतों के आधार पर दो वर्गों में विभाजित किया गया..

१. कार्बनिक पदार्थ : ऐसे पदार्थ जो जीवधारियों (पौधों एवं जंतुओं ) से प्राप्त होते हैं ।
जैसे : यूरिया , ग्लूकोज एसिटिक अम्ल , आदि 

२. अकार्बनिक पदार्थ : ऐसे पदार्थ जो निर्जीवों ( खनिज ,चट्टानों आदि ) से प्राप्त होते हैं ।
जैसे : सोडियम क्लोराइड , हाइड्रोजन क्लोराइड, कैल्शियम कार्बोनेट आदि ।

नोट :  “बर्जीलियस” ने जीवो से प्राप्त पदार्थों के लिए सर्वप्रथम “ ऑर्गेनिक ” शब्द का प्रयोग किया , जिसका अर्थ होता है  “ जैव ” या “ जीवो से संबंधित ”।


बर्जीलियस का जैव शक्ति सिद्धांत :

“ कार्बनिक यौगिकों का संश्लेषण केवल जैव शक्ति के प्रभाव से जीवों द्वारा शरीर के अंदर होता है ,  अतः कार्बनिक यौगिकों का संश्लेषण कृत्रिम विधियों द्वारा नहीं किया जा सकता है । ” 

[ जैव शक्ति : वह शक्ति जो जीवधारियों के जीवन के लिए आवश्यक होता है ।]

बर्जीलियस के जैव-शक्ति सिद्धांत का खंडन :

✓ सम 1828 में “होलर” ने सर्वप्रथम प्रयोगशाला में कार्बनिक योगिक “यूरिया” का संश्लेषण कर बर्जीलियस के जैव शक्ति सिद्धांत का खंडन किया।

होलर के अनुसार ,

“अकार्बनिक योगिक ‘अमोनियम साइनेट’ को गर्म करने पर कार्बनिक योगिक ‘यूरिया’ में बदल जाता है।”

NH4OCN  + गर्म → NH2CONH2

✓ 1845 में कोल्बे ने प्रयोगशाला में एसिटिक अम्ल का संश्लेषण किया।

✓ 1856 में बर्थोले नेे प्रयोगशाला में मीथेन का संश्लेषण किया।

कार्बनिक यौगिक की आधुनिक परिभाषा : 

ऐसे यौगिक जिसमें कार्बन मुख्य तत्व के रूप में उपस्थित रहता है कार्बनिक यौगिक कहलाता है।

[अपवाद : कार्बन डाइऑक्साइड , कार्बन मोनोऑक्साइड , कार्बन डाईसल्फाइड , सायनाइड धातुओं के कार्बोनेट आदि को छोड़कर।]

कार्बनिक रसायन : रसायन विज्ञान की वह उपशाखा जिसके अंतर्गत कार्बन के यौगिकों का अध्ययन किया जाता है , कार्बनिक रसायन कहलाता है।

Comments